कल चाँद कुछ यूं नजर आया ।
हर देखने वाले को अपना बचपन नजर आया।।
गुजरती थी रातें गिनकर चाँद सितारे।
आज फिर केरोन ने वो दिन दिखाये।।
ताजी हवा है,खूबसूरत शमा है।
आसमान में उड़ते परिंदे जवां है।।
चिड़ियों की चहक है,फूलों की महक है।
घर मे रहो तो मुसीबत नही इधर है ।।
बच्चे भी खुश है ,बड़े भी खुश है।
जो ढूंढते थे बाहर, वो खुशियां इधर है।।
सुबह की चाय, चाह बन गयी सबकी।
पीते थे अकेले जिसे, अब सबके साथ बन गयी ।।
खाना भी साथ, हर बहाना भी साथ।
एक आशियाना है अपना,हुआ अहसास साथ ।।
पुराने शौक फिर ज़िंदा हो गए।
पतंग हाथ मे लेकर हम परिंदा हो गए।।
झड़ गयी धूल, कैरम और गोटी से।
निकल आयी लूडो,घर की कोठी से।।
न जरूरत पैसे की,न कमाई का झंझट।
कैरोना के कारण पास आ गया सब घर।।
हेमंतश्रीवस्तव "हेमू"
हर देखने वाले को अपना बचपन नजर आया।।
गुजरती थी रातें गिनकर चाँद सितारे।
आज फिर केरोन ने वो दिन दिखाये।।
ताजी हवा है,खूबसूरत शमा है।
आसमान में उड़ते परिंदे जवां है।।
चिड़ियों की चहक है,फूलों की महक है।
घर मे रहो तो मुसीबत नही इधर है ।।
बच्चे भी खुश है ,बड़े भी खुश है।
जो ढूंढते थे बाहर, वो खुशियां इधर है।।
सुबह की चाय, चाह बन गयी सबकी।
पीते थे अकेले जिसे, अब सबके साथ बन गयी ।।
खाना भी साथ, हर बहाना भी साथ।
एक आशियाना है अपना,हुआ अहसास साथ ।।
पुराने शौक फिर ज़िंदा हो गए।
पतंग हाथ मे लेकर हम परिंदा हो गए।।
झड़ गयी धूल, कैरम और गोटी से।
निकल आयी लूडो,घर की कोठी से।।
न जरूरत पैसे की,न कमाई का झंझट।
कैरोना के कारण पास आ गया सब घर।।
हेमंतश्रीवस्तव "हेमू"